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हम कहाँ से कहाँ आ गए

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मेरा महान देश (विस्मृत संस्कृति से परिचय) में दुर्गा प्रसाद शर्मा, एडवोकेट, इंदौर का सादर अभिनन्दन। हमारे बचपन का समय और आज का समय कितना बदल गया है हम क्या थे, कहाँ थे और आज क्या हो गए, कहाँ आ गए, इस सम्बन्ध में जब भी सोच विचार आता है तब यादों के कई पन्ने खुल जाया करते हैं साथ ही अपनी तब की स्थिति और आज के बच्चों की स्थिति को देखकर, विचार करके भी कई विचार मन में स्वतः ही आ जाते हैं, तुलनात्मक आकलन भी समक्ष आ जाता है, मन भर भी जाता है, आँखे नम भी हो जाती है। आज का यह 159 वां लेख अपने उन सभी बचपन के मित्रों, सहपाठियों और साथियों को समर्पित है, जिनके साथ हमने एक अलग ही जीवन व्यतीत किया जिसकी आज केवल कल्पना अथवा तुलना ही की जा सकती है।  आज उस समय के जीवन का विचार करना ही किसी स्वप्न से कम नहीं है।  हमें मिले उस जीवन और आज की वर्तमान पीढ़ी को मिले इस जीवन में कितना कुछ बदल गया है  फिर भी जो शांति और सुकून आभाव भरे समय में हमारे उस जीवन में था वह आज समस्त सुख सुविधाओं वाले समय में भी क्यों नहीं है, यह विचारणीय प्रश्न है।